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Saturday, March 1, 2014

पल पल रंग बदलती है यह ज़िन्दगी

पल पल रंग बदलती है यह ज़िन्दगी 
जाने कितने खेल खेलती है ज़िन्दगी। 

अरमान बहुत पाले थे मैंने अपने मन में 
सपने बहुत से संजोये थे इस जीवन में 
पर वक़्त बदला, परिस्तिथियां बदलीं 
और पल में अचानक बदल गयी ज़िन्दगी। 
बदलाव यह स्वीकार न था मुझे, पर  
इन्कार का मौका कब देती है ज़िन्दगी।  
पल पल रंग बदलती है यह ज़िन्दगी 
जाने कितने खेल खेलती है ज़िन्दगी।

अभी तो शुरुआत ही हुई थी जीवन की  
सपनों की उड़ान भरना बाकी ही था। 
पर वक़्त-दर-वक़्त मेरे हालात बदले   
और फिर एक दिन अचानक सब बदला।
बदलाव की बहती बयार में बदली मैं   
और फिर पल में ही बिखर गयी ज़िन्दगी। 
पल पल रंग बदलती है यह ज़िन्दगी 
जाने कितने खेल खेलती है ज़िन्दगी।

ज़िन्दगी से कब तक खेलूं आंखमिचौली मैं 
थक सी गयी हूँ अब इस खेल में, पर अभी 
थकना नहीं है मुझे, लड़ना है, जीतना है 
और बदलना है ज़िन्दगी का हर एक पल। 
क्योंकि खूबसूरत है यह नियामत बहुत 
कहते हैं जिसे हम सभी 'ज़िन्दगी', माना 
पल पल रंग बदलती है यह ज़िन्दगी, पर  
उन पलों में रंग भी भरती है यही ज़िन्दगी।      

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