उफ्फ यह सियासत। दिल कर रहा है कि जल्द ही चुनाव खत्म हों और नेताओं की बदजुबानी से छुटकारा मिले। चुनावी सरगर्मी के माहौल में सभी अपनी जुबान को खूब तकलीफ दे रहे हैं। लोकतंत्र के नाम पर चलने वाला यह मेला ख़त्म हो तो इन लोगों के अपशब्दों से लोगों का पीछा छूटे और टीवी चैनलों पर नेताओं की भिडंत रुके।
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